Clash of Convictions: The Monk and the Skeptic – Ek Gehra Vishleshan

 Clash of Convictions: The Monk and the Skeptic – Ek Gehra Vishleshan





आज के डिजिटल एरा में पोडकास्टस और डिबेट्स के ट्रेंड बहुत बढ़ गए है. लेकिन  जब बात सनातन धर्म और बुद्धिस्ट फिलोसोफी जैसे ज्ञान वर्धक विषयों की हो, तोह डिस्कशन का लेवल भी उतना ही डिग्निफ़िएड होना चाहिए। रिसेंटली एक वायरल वीडियो जिसमे बुद्धिस्ट और सनातन धर्म की फिलोसोफी पर डिस्कशन चल रही थी. डिस्कशन धीरे धीरे अग्रेसिव होते चली गई और बुद्धिस्ट मोंक को बिच में ही पॉडकास्ट रोक कर जाना पड़ा. इस पॉडकास्ट को देखने के बाद ये समझ में आता है की कैसे एक उनपरेपरेड़ होस्ट और दिस्रेसपेक्टफुल्ल एनवायरनमेंट किसी भी इंटेलेक्चुअल डिस्कोर्स को ख़तम कर सकते हैं. 


Why the Host was Not a Perfect Representative of Sanatan Dharm 


सनातन धर्म का आधार है ‘ अतिथि देवो भवः ‘ और ‘सत्या’. लेकिन इस पॉडकास्ट मैं होस्ट का बिहेवियर इन वैल्यूज से बिलकुल विपरीत दिखाई दिया। 


१. एक अच्छा श्रोता न होना :- एक अचे वक्ता होने के लिए एक अच्छा श्रोता भी होना पड़ता है।  जो की होस्ट में बिलकुल नै दिखाई दे रहा था।  बुद्धिस्ट मोंक से सवाल पूछना और जवाब ख़तम होने के पहले ही दूसरा सवाल करना ये अनैतिक और असिसटता का प्रमाण देती है।  जो सनातन धर्म बिलकुल इसका सहयोग नई करता है।  


२. स्क्रिप्टुरेस का अधूरा ज्ञान होना :- बुद्धिस्ट मोंक ने बुद्धिस्ट फिलोसोफी के हिसाब से टेलेपोर्टेशन करने या होने की बात की।  एक व्यक्ति  स्थान से दूसरे स्थान पर स शरीर प्रकट या टेलिपोर्ट हो सकता है।  जिसमे होस्ट ने आक्षेप करते हुए कहा की सनातन धर्म के हिसाब से स सरीर टेलिपोर्ट होना संभव नहीं है. जबकि एक गाथा के अनुसार श्री कृष्णा के गुरु के पुत्र की मृत्यु हो जाती किसी कारन वस तो श्रीकृष्ण स शरीर यम लोक के जाते है गुरु पुत्र को लाने।  एक दूसरी गाथा   अनुसार महर्षि विश्वामित्र जो की जन्म से छत्रिये थे बाद में कर्म से वो ब्राह्मण बने उन्होंने एक व्यक्ति को स सरीर स्वर्ग वेजने का वचन दे दिया।  जब देवताओ ने उनकी विनती नहीं मानी तो उन्होंने उस व्यक्ति के लिए एक अलग की स्वर्ग लोक का निर्माण कर दिया ऐसी कई गाथा है जो स शरीर टेलिपोर्ट होने के बात करते है।  पर होस्ट को तो अपने ही धर्म को रिसर्च करने की समय नहीं है और दुसरो की धर्म पर आक्छेप करते है।  


३. अतिथि सत्कार का अभाव :-  होस्ट ने खुद ऑन  कैमरा माफ़ी मांगी की  बार मोंक के आने जाने की व्यवस्था नहीं की और उन्होंने उन्हें रोड तक छोड़ने भी नहीं गए।  अरे मुर्ख बालक अगर हमारे मित्र भी हमारे घर आते है तो हम उनको अपने घर के चौखठ तक कम से कम छोड़ने जाते है।  क्या तुम्हे इतना भी शिक्षा नहीं मिली है. हर बात पर तुम गीता का श्लोक उठा कर रिफरेन्स देते हो और उसका श्लोक का स सब्द मतलब भी नहीं समझा पाते हो. और फिर फिर अपने आप को अज्ञानी कह कर बचने की कोसिस करते हो।  अगर तुम अगयानी ही हो तो एक पढ़े लिखे व्यक्ति के ऊपर आक्छेप करने का हक तुम्हे किसने दिया।  


४.फोकस ऑन व्यूज ओवर ट्रुथ :- चुकी पिछले पॉडकास्ट में लगभग ७ लाख व्यूज आयी थी इसलिए और  करने के लिए फिर से मोंक को बुला कर पॉडकास्ट किया इन्हे तो ज्ञान से कोई मतलब ही नहीं था। इनको पता है की कौन सा टॉपिक सेलेक्ट किया जाय जिसमे जयादा से ज्यादा व्यूज आएंगे।  इसीलिए तो इनका ज्यादा वीडियोस भूत, पिचास, तंत्र, और मंत्र जैसे टॉपिक पर होता है।  क्यूंकि ऐसे वीडियोस में सस्पेंस और थ्रिलर जैसे कांसेप्ट को घुसा कर अच्छे व्यूज लाना बहुत आसान है. अगर इनका मोतिवे ज्ञान पाना और लोगो तक ज्ञान पहुंचना होता तो ये विज्ञान या स्किल डेवलपमेंट जैस टॉपिक पर वीडियोज बनाते उन पर भी व्यूज अच्छे  आते है।  पर इन्हे तो सिर्फ अंधविश्वास फैलाने है. एक अच्छा मौका मिला था इनको अपने छवि को सुधरने का बट वो भी गवा दिए. ये सनातनी कम और इस्लामिक पर्सन जैसे ज्यादा व्यवहार कर रहे थे।  इस्लाम में ही सिर्फ धर्म के ऊपर कुछ भी बोलने की आजादी नहीं है पर सनातन तो इसकी आजादी बिलकुल देता है. 


 Why Intellectual Monks Should Avoid Such Debates 

बुद्धिस्ट मॉन्क्स जो सालों तक ध्यान और शास्त्रः का अध्ययन करते हैं, उन्हें ऐसे स्ट्रीट स्टाइल डिबेट्स से बचना चाहिए।

१. Disrespect of the Path: वीडियो में देखा गया की मोंक को बार बार इंटरप्ट क्या गया।  जब एक गेस्ट को अपनी बात  मौका ही नहीं दिया जायेगा तो ज्ञान का प्रसार नामुंमकिन है।  

 २.Sarcastic Environment:  होस्ट ने मोंक को “आईफोन वाला मोंक “ और “इंटेलेक्चुअल मोंक “ कह  मारा।  एक सच्चा  कभी भी किसी के लाइफस्टाइल या टूल्स जैसे की आईफोन का मज़ाक नहीं उड़ाएगा अगर वो सच में फिलोसोफी समझना चाहता है तो। 

३. Mocking Mindfulness: होस्ट ने मोंक के “रील्स” देखने या  मज़ाक उड़ाया  की एक मोंक भी मॉडर्न टूल्स उसे कर सत्ता है पाने काम के लिए. अगर मोंक मॉडर्न टूल्स अपने ज्ञान को आम जान मनुसया तक पहुंचने के लिए तो आज आपको या अपने जैसे कई यूट्यूब चैनल्स को इन्हे सुनाने या इनके ज्ञान को समझने का मौका न मिलता।  

४. Blame Game: जब होस्ट के पास तर्क ख़तम हो गए, तोह उसने “ब्लामे गेम” शुरू कर  मोंक एग्रेसिव हो रहे हैं, जबकि मोंक सिर्फ लॉजिक दे रहे थे। 


Sanatan Dharm Perspective and God Buddha’s Message 


सनातन धर्म सिखाता है की हर जिव में इस्वर है (“कण कण में हरी”) . ये निष्काम कर्म की बात करता है।   जो की बोध धर्म में भी बात होता है की दुख का कारन क्या है।  तो बोध धर्म बताता है की दुःख के तीन कारन है one, anger and 'negative' emotions; two, greed, craving and attachment; and, three, delusion . और इसी फिलोसोफी को सनातन धर्म में भक्ति के मार्ग से गीत के माध्यम से समझाया गया है की “ कण कण में हरी है “ . कहने का मतलब है की इस्वर से हम क्रोध नहीं करते है. इस्वर को हम अपना समर्पण दिखते है।  तो लालच और नेगेटिव इमोशन का जगह ख़तम हो जाता है. इसीलिए अगर हम अगर हम हर जिव और हर वस्तु को इस्वर मान ले तो तीनो चीज जो दुःख का कारन है वो भी ख़तम हो जाता है।  दोनों ओर से सेम चीजे ही समझाई जा रही है पर तरीका अलग है एक भक्ति के मार्ग से भावनात्मक अटैचमेंट से समझाया जा रहा है तो एक तरफ फिलॉसॉफिकल्ली वेल डिफाइंड वे में समझे जा रही है. 


Lord Buddha ka message 'Awareness' (Sati) aur 'Mindfulness' pe hai. बुद्धा ने कहा की किसी भी चीज़ को सिर्फ इसीलिए मत मानो क्यूंकि वह पुराणी है या किसी ने कही है. बल्कि उसे अपने अनुभव से जानो।  बुद्धा ने ईश्वर किस जगह धम्म (प्राकृतिक नियम ) और ‘कर्म’ (Action-Effect) को महत्व दिया है  


इसे और भी अचे तरीके से समझा या समझाया जा सकता है अगर एक सनातन धर्म के अचे रिप्रेजेन्टेटिव या रिसर्चर  डिसकस किया जाए।  मेरे नजर में अवि अवि यूथ में ह्यपरक क्वेस्ट ( Hyper Quest ) के चैनेल उपयुक्त नजर आ रहे है। 


culprit in all dharma :- बौद्ध धर्म में अहिंसा को परम धर्म मन गया है।  अहिंसा का मतलब सिर्फ मर काट ही नहीं है।  अगर हम अपने सब्दो के माध्यम से भी किसी को छती पहुंचते है तो उसे भी अहिंसा माना जायेगा।  पर बौद्ध धर्म के कई रेप्रेज़ेंटेटिव अपने फाउंडेशनअल फिलोसोफी को भूल चुके है. मै कई यूट्यूब के वीडियोस का रिफरेन्स दे सकता हु जिसमे बौद्ध धर्म के लोग हिन्दू देवी देवता को गाली दे रहे है. क्या ये हिंसा नहीं है।  




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